• 15 Apr, 2026

तरनतारन (Punjab) के हरिके हेडवर्क्स पर पानी की आवक घटी, तटबंध मजबूत करने में सेना भी उतरी मैदान में

तरनतारन (Punjab) के हरिके हेडवर्क्स पर पानी की आवक घटी, तटबंध मजबूत करने में सेना भी उतरी मैदान में

तरनतारन (Punjab)में सतलुज और ब्यास के संगम हरिके हेडवर्क्स पर पानी की आवक में कमी दर्ज की गई है। शुक्रवार सुबह 3.12 लाख क्यूसिक पानी आया, जबकि पाकिस्तान की ओर 2.95 लाख क्यूसिक पानी छोड़ा जा रहा है। संभावित बाढ़ खतरे से निपटने के लिए तटबंधों को मजबूत करने में सेना और प्रशासन संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं।

तरनतारन (Punjab) जिले में सतलुज और ब्यास नदियों के संगम हरिके हेडवर्क्स पर पानी का दबाव धीरे-धीरे कम हो रहा है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार शुक्रवार सुबह अपस्ट्रीम में 3.12 लाख क्यूसिक पानी दर्ज किया गया, जबकि डाउनस्ट्रीम की ओर पाकिस्तान में 2.95 लाख क्यूसिक पानी छोड़ा गया। गुरुवार शाम यह आंकड़ा 3.16 लाख क्यूसिक था। बीते मंगलवार और बुधवार को पानी की आवक अचानक बढ़कर 3.53 लाख क्यूसिक तक पहुँच गई थी, जिससे प्रशासन अलर्ट हो गया था।

बाढ़ की संभावनाओं को देखते हुए तटबंधों को मज़बूत करने के लिए सेना की मदद ली जा रही है। जिले की सीमा में लगभग 27 किलोमीटर लंबे तटबंध मौजूद हैं, जिनमें से 10 किलोमीटर के दायरे में 12 जगहों पर कमजोर हिस्से पाए गए हैं। इनकी मरम्मत तेजी से करवाई जा रही है।

अब तक तरनतारन जिले की लगभग 12,828 हेक्टेयर उपजाऊ भूमि पानी से प्रभावित हुई है। राहत और बचाव कार्यों में जिला प्रशासन, पुलिस, सामाजिक और धार्मिक संस्थाएँ मिलकर काम कर रही हैं। कर सेवा सरहाली और सुर सिंह संप्रदाय सहित कई स्वयंसेवी संगठन भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

सबसे बड़ी चुनौती गांव सभरा और मरड में सामने आ रही है, जहां तटबंध टूटने की आशंका बनी हुई है। यदि पानी का स्तर फिर से बढ़ता है तो जिले के करीब 60 गांवों में बाढ़ का खतरा मंडरा सकता है। खडूर साहिब, गोइंदवाल साहिब, चोहला साहिब, मुंडा पिंड, गुजरपुरा और कर्मूवाला सहित कई इलाके पहले से ही प्रभावित हैं।

प्रशासन लगातार हालात पर नज़र बनाए हुए है और सेना के सहयोग से तटबंधों को सुरक्षित करने की कोशिशें जारी हैं, ताकि संभावित बाढ़ से लोगों की जान और संपत्ति को बचाया जा सके।

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