• 15 Apr, 2026

Bhimtal Student Suicide Case : रैगिंग के आरोपों से मचा हड़कंप, पुलिस ने फोरेंसिक जांच तेज की

Bhimtal Student Suicide Case : रैगिंग के आरोपों से मचा हड़कंप, पुलिस ने फोरेंसिक जांच तेज की

बीसीए द्वितीय वर्ष की छात्रा वसावी तोमर ने यूनिवर्सिटी हॉस्टल में की आत्महत्या, पिता ने लगाया रैगिंग और यूनिवर्सिटी प्रबंधन की लापरवाही का आरोप

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भीमताल यूनिवर्सिटी की छात्रा की संदिग्ध मौत: रैगिंग के आरोपों ने उठाए कई सवाल

उत्तराखंड के नैनीताल ज़िले के भीमताल क्षेत्र में स्थित एक निजी विश्वविद्यालय की छात्रा की मौत ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी है। मृतक छात्रा, वसावी तोमर, लखनऊ की रहने वाली थी और बीसीए द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रही थी। वह विश्वविद्यालय के हॉस्टल में रह रही थी।

30 जुलाई को उसका शव हॉस्टल की छत से लटका हुआ पाया गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

पिता ने लगाए गंभीर आरोप

1 अगस्त को वसावी के पिता, राम सिंह तोमर, ने इस मामले में चौंकाने वाले आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी को हॉस्टल में रैगिंग का सामना करना पड़ रहा था और उसने परिवार को इस बात की जानकारी दी थी। बताया जा रहा है कि वसावी ने एक वीडियो भी भेजा था जिसमें एक सीनियर छात्रा द्वारा मानसिक प्रताड़ना का उल्लेख था। पिता का आरोप है कि उन्होंने विश्वविद्यालय प्रबंधन को इस बारे में कई बार अवगत कराया, लेकिन कोई मदद नहीं मिली।

विश्वविद्यालय का इनकार

विश्वविद्यालय के निदेशक, प्रो. एन.के. नायर, ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि संस्थान में रैगिंग के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस नीति लागू है। उन्होंने यह भी कहा कि वसावी खुद द्वितीय वर्ष की छात्रा थीं, इसलिए उनके साथ रैगिंग की संभावना कम है। यूनिवर्सिटी प्रशासन का दावा है कि उन्होंने पुलिस को मोबाइल फोन और अन्य ज़रूरी सामान सौंप दिया है और जांच में पूरा सहयोग किया जा रहा है।

पुलिस जांच के कई पहलू

पुलिस इस मामले की तह तक जाने के लिए फोरेंसिक टीम और साइबर सेल की मदद ले रही है। एसपी (ट्रैफिक) डॉ. जगदीश चंद्र ने बताया कि छात्रा के कमरे को सील कर दिया गया है और उसका मोबाइल डाटा, कॉल रिकॉर्ड, तथा चैट हिस्ट्री की जांच की जा रही है। कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, लेकिन मोबाइल में कुछ संदिग्ध संदेश पाए गए हैं जो जांच में मददगार साबित हो सकते हैं।

पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि यदि वसावी किसी प्रकार के मानसिक दबाव या उत्पीड़न का शिकार थीं, तो उन्होंने इसकी पूरी जानकारी अपने मित्रों या परिवार के अन्य सदस्यों को क्यों नहीं दी। जिस समय यह घटना हुई, उस वक्त वसावी के साथ कमरे में रहने वाली दो छात्राएं क्लास में थीं।

परिवार की मांग: न्याय और सच्चाई सामने आए

वसावी के परिजनों का कहना है कि उनकी बेटी बेहद जिंदादिल और आत्मविश्वास से भरपूर थी। उनका मानना है कि वह आत्महत्या जैसा कोई कदम नहीं उठा सकती। परिवार ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

यह घटना न केवल एक छात्रा की दुखद मृत्यु है, बल्कि यह उच्च शिक्षा संस्थानों में रैगिंग, मानसिक स्वास्थ्य, और छात्र सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को फिर से सामने लाती है। अब सबकी नजरें पुलिस की जांच और फोरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी हैं — क्या वसावी को न्याय मिलेगा?

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